गाँव
,गली,चौबारे बोले, नगर उपनगर सारे बोले,
शोर शराबे
, नारे बोले,प्रहर दिवस पखवारे बोले
ले ले कर जयकारे बोले
.
सत्ता के गठजोड़ बोले
एक सौ बीस करोड़ बोले
मैं भी अन्ना
, मैं भी अन्ना,
मैं भी अन्ना
,मैं भी अन्ना,
बाप दल बदल में पारंगत
, बेटे बोले मैं भी अन्ना,
भ्रष्टाचार मिटाने रथ पर लेटे बोले मैं भी अन्ना
,
मन के मोहित भ्रष्ट तन्त्र के मुखिया बोले जाओ अन्ना
,
अपनों की करनी से विचलित दुखिया बोली गाओ अन्ना ।
योग गुरु थे
,अब व्यापारी ,वो भी बोले मैं भी अन्ना,
व्यास पीठ पर कसे सवारी
,
वाणी के कालाबाजारी
,तो भी बोले मैं भी अन्ना,
बोतल हो तो जिन्न निकाले पत्रकार भी बोले अन्ना
बजन लिफाफे का लखकर मजमून बना लें
,
संपादक भी बोले अन्ना
कालेज की देहरी न लांघते प्रोफेसर भी बोले अन्ना
हर घंटे में फीस मांगते डाक्टर बोले मैं भी अन्ना
ठंडी दारू
,गरम लड़कियाँ फिल्मी हीरो बोले अन्ना
शिक्षाजग के बड़े माफिया इल्मी जीरो बोले अन्ना
दस की लिये सुपारी बोले मैं भी अन्ना
,मैं भी अन्ना,
फड़ पर जुड़े जुआरी बोले मैं भी अन्ना
,मैं भी अन्ना,
मंदिर का चन्दा चटकारे लम्बू बोले मैं भी अन्ना
,
दुनियां भर का ब्याज डकारे अम्बू बोले मैं भी अन्ना
,
पउवा
, बाइक,गर्लफ्रेण्ड संग फेश ढ़ांक कर बोले अन्ना
पाकेट लाकेट पर्स चैन पर हाँथ साफ कर बोले अन्ना
हर बिस्तर गरमाने वाली टल्ली बोली मैं भी अन्ना
सौ सौ चूहे खाने वाली बिल्ली बोली मैं भी अन्ना
,
चिन्ता नहीं किधर जायेगा अब तो देश सुधर जायेगा
बूढ़ा बड़ा किशोर युवा जब हुआ आज हर बच्चा अन्ना
रालेगढ़ का सन्त कहें
,अब चुप जहना ही अच्छा अन्ना।।
डा० विनोदनिगम

sir aapke geet dekhe ek kshepak behad samyik or prabhshil kavita hai
ReplyDeleteshubhkaamnayen
बहुत सुन्दर अभीव्यक्ति विनोदजी | आभार
ReplyDeleteTamasha-E-Zindagi
Tamashaezindagi FB Page
नये साल जी
ReplyDeleteअब की लाना नये साल जी
ज्यादा खुशियाँ, कम बवाल जी
हँसी-खुशी के मौके लाना
फिर विराट के चौके लाना
धोनी जीतें, मूँड़ मिड़ायें
ऐसे दृश्य अनोखे लाना
गाली बकना छोड़ हमारे
नेता बोलें मीठी बानी
सब को छत, सबको दो रोटी
सबको शिक्षा सबको पानी
समाधान हों, नब्बे प्रतिशत
दस प्रतिशत ही हों सवाल जी
ले आना दादी का चश्मा
दादा जी का स्वेटर-शाल
धोती नई मिले अम्मा को
बापू के भी सुधरें हाल
मन्दिर गले मिलें मस्जिद से
साझा, ईद, दिवाली सबकी
सबके कानों हो गुरुबानी
हर घर केक कटे, क्रिसमस का
किसी भले को ताज मिले जी
जन गण मंगल, राज मिले जी
यही प्रार्थना, यही इबादत
दस रुपये में, प्याज मिले जी
नाकाबिल कुर्सी ना पाएँ
इसका भी रखना खयाल जी
डा॰ विनोद निगम
होशंगाबाद